वूमन प्रीमियर लीग के मैचों पर ऑनलाइन सट्टा; पंचकूला में हाई-टेक गिरोह के 7 आरोपी गिरफ्तार
Online betting on Women's Premier League Matches
मौके से 7 लाख नकदी, 4 लैपटॉप, 46 मोबाइल फोन, 2 कंप्यूटर स्क्रीन, 3 टैबलेट और साउंड रिकॉर्डर बरामद
अर्थ प्रकाश संवाददाता
पंचकूला। Online betting on Women's Premier League Matches: इंडिया वूमन प्रीमियर लीग के मैचों पर ऑनलाइन सट्टा लगाने का हाईटेक मामला बुधवार को पंचकूला में सामने आया। डिटेक्टिव स्टाफ की टीम ने सीक्रेट इंफॉर्मेशन पर पंचकूला के सेक्टर-21 स्थित एक कोठी में छापेमारी की। पुलिस ने मौके से सात आरोपियों को गिरफ्तार किया। सभी मोबाइल और लैपटॉप के जरिए बड़े पैमाने पर सट्टे लगाते पकड़े गए। स्टाफ ने अपनी यह कार्रवाई देर रात को अंजाम दी। डिटेक्टिव स्टाफ के इंचार्ज मनदीप सिंह को गुप्त सूचना मिली थी कि सेक्टर-21 की एक किराए की कोठी में यूपी और बैंगलोर के बीच चल रहे क्रिकेट मैच पर हार-जीत की बाजी लगाई जा रही है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने तुरंत दबिश दी। आरोपी तकनीकी उपकरणों की मदद से ऑनलाइन सट्टा खिलाते रंगे हाथों पकड़े गए। पकड़े गए आरोपियों की पहचान पवन महाजन (चंडीगढ़), अमित भाटिया (पंचकूला), समीर वधवा (चंडीगढ़), अंकित अग्रवाल (पंचकूला), अनिल कुमार (चंडीगढ़), निपुण अरोड़ा (पंचकूला) और अंशु शर्मा (जम्मू) के रूप में हुई।

एसीपी क्राइम अरविंद कंबोज ने बताया कि पुलिस ने मौके से 7 लाख रुपये नकद, 4 लैपटॉप, 46 मोबाइल फोन, 2 कंप्यूटर स्क्रीन, 3 टैबलेट और साउंड रिकॉर्डर सहित भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ जुआ अधिनियम की धारा 4(1) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी इस किराए की कोठी का इस्तेमाल केवल सट्टेबाजी के नेटवर्क को संचालित करने के लिए कर रहे थे।
देश में फैला नेटवर्क, जांच शुरू
डीसीपी क्राइम एंड ट्रैफिक मनप्रीत सिंह सूदन ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से समीर वाधवा, पवन महाजन और अमित भाटिया को 13 जनवरी को न्यायालय में पेश कर एक दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया था। पूछताछ की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, आज सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब इस मामले में अन्य संभावित कड़ियों की तलाश कर रही है।
पंचकूला पुलिस किसी भी प्रकार की अवैध सट्टेबाजी और जुआ गतिविधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है। यह गिरोह आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर युवाओं और आम जनता को गुमराह कर रहा था। हमने आरोपियों को रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की है ताकि इस सिंडिकेट की जड़ों तक पहुंचा जा सके और यह पता लगाया जा सके कि इनके तार और कहाँ-कहाँ जुड़े हैं। हमारा उद्देश्य शहर को ऐसे अपराधों से मुक्त करना है।